120+ Lips shayari in Hindi | लिप्स शायरी इन हिन्दी 2025
होंठ इंसान की सबसे खूबसूरत पहचान होते हैं, जो कभी मुस्कान से दिल जीत लेते हैं और कभी खामोशी से गहरी बातें कह जाते हैं। इन पर सजी मुस्कान रिश्तों को और मीठा बना देती है और इनकी खामोशी हज़ार एहसास जता देती है। Lips Shayari In Hindi इन्हीं रोमांटिक और भावुक लम्हों को शब्दों में पिरोकर पेश करती है। इस लेख में आपको मिलेंगी ऐसी शायरियां जो होंठों की मासूमियत, उनकी मिठास और उनके जज़्बातों को बयां करती हैं। इन्हें पढ़कर हर दिल को प्यार और रोमांस का एहसास होगा।
Lips shayari in Hindi
तेरे लव जब मेरे लबों पर मिलते है
मेरे दिल में मोहब्बत के फूल खिलते है..!!!
पलकों पे रखा है तुझको इस प्यार की तरह
सीने से लगाया है तुझे इस एहसास की तरह..!!!
माफ़ करना मेरी गुस्ताखियाँ कुछ बढ़ गई
है अब मैं तेरे तस्वीर में तेरे होंटों को चूम लेता हूँ..!!!
जिसे याद करने से होंठों में मुस्कुराहट
आ जाए एक ऐसा खूबसूरत ख्याल हो तुम..!!!
आपके लबों पर न जाने कैसा ये मदहोश नशा छाया है
जो एक बार चुम ले वो झूमता ही रहता है..!!!
तेरे होंठो की मिठास बयां करती है
जैसे ख्वाबो की बारिश महकती है..!!!
कभी तुम नाराज हुए तो हम झुक जायेंगे
कभी हम नाराज हुए तो मेरे होठों को चूम लेना।
तेरे होंठो का जादू समझ नही आता
हर बार ये दिल को बहका जाता..!!!
आंखों से नींद होठों से हंसी
दिल से धड़कन नाराज क्यो है
क्या हुई खता मुझसे मेरे खुदा
मेरा हमदम उदास क्यो है.!!
देख कर तेरे रुख़्सार ओ लब यक़ीं आया
कि फूल खिलते हैं गुलज़ार के अलावा भी !
नाज़ुकी उस के लब की क्या कहिए
पंखुड़ी इक गुलाब सी है !
रख दे मेरे होठो पे अपने होंठ कुछ इस
तरह या तेरी प्यास बुझ जाये या
मेरी साँस रुक जाये !
इन होंठो को परदे में छुपा लिया
किजिए हम गुस्ताख लोग हैं नजरों से
भी चूम लिया करते हैं !
सिर्फ़ उस के होंठ काग़ज़ पर बना देता
हूँ मैं ख़ुद बना लेती है होंटों पर हँसी अपनी जगह !
मुझसे अच्छा तो तेरे होंठों पर निखारा
तिल है जब मुस्कुराती है तू दुनियाँ को नज़र आता है !
वो पिला कर जाम लबों से अपनी
मोहब्बत का अब कहते है नशे की
आदत अच्छी नहीं होती!
मोहब्बत के रंग में डूबी शाम हो
इक नई शुरूआत का पैगाम हो
मेले तेरे होंठ मेरे होंठो से !
मेरा अपना तजुर्बा है तुम्हें बतला रहा हूँ मैं
कोई लब छू गया था तब कि अब तक गा रहा हूँ मैं !
लहराती जुल्फे कजरारे नयन और
ये रसीले होंठ बस कत्ल बाकी है
औज़ार तो सब पुरे हैं !
बहक न जाये कहीं लौ की नीयत
होठों से दिया तुम बुझाया न करो
वो सुर्ख होंठ और उनपर जालिम
अंगडाईयां तू ही बता ये दिल मरता
ना तो क्या करता।
Beautiful Lips Shayari
मैं इक फकीर के होंठों की मुस्कुराहट हूँ
किसी से भी मेरी कीमत अदा नहीं होती !
खामोश तुम भी मेरे होंठ भी थे बंद
फिर कौन था जो इतनी देर बोलता रहा !

तुझ सा कोई जहान में नाज़ुक-बदन कहाँ
ये पंखुड़ी से होंठ ये गुल सा बदन कहाँ !
रंगने का मज़ा तब है जब ना हो रंग ना हो
गुलाल इधर हमारे होंठ हो उधर तुम्हारे गाल !
कल रात ज़िन्दगी से मुलाक़ात हो गई
लब थर-थरा रहे थे मगर बात हो गई!
लफ़्ज़ अगर कुछ ज़हरीले हो जाते है
होंठ न जाने क्यूँ नीले हो जाते है!
होठो पर होठ रखकर सो गये हैं
वो कि गर्मी के मौसम में कहीं प्यास न लग जाएँ
तेरे होंठो को देखा तो एक बात उठी
जहन में वो लफ्ज़ कितने नशीले होंगे
जो इनसे होकर गुजरते है
उसने होंठों को अपने दांत में दबा के
मुझसे कहा मैं दबाऊं तो दर्द क्यों
तुम दबाओ तो लुत्फ़ क्यों !
न आए लब पे तो काग़ज़ पे लिख दिया
जाए किसी ख़याल को मायूस क्यों किया जाए !
आँखों की गहराई को समझ नहीं सकते
होंठो से कुछ कह नहीं सकते कैसे इज़हार
करे हम आपको ये दिल का हाल की तुम
ही हो जिसके बिना हम रह नहीं सकते !
गुलाबी होठ और होठों को दाँतों से दबाना
सीखा है कहाँ से ये बिजलियाँ गिराना।
तेरे होठों की तिश्नगी को गले से लगाना है
कमबख्त ऐसी कोई रात हो तो सही !
अच्छा लगता है मेरे होठों पर रख कर
अपनी उंगली
जब बोलते हो तुम अब चुप भी रहो तुम।
आँख में पानी रखो होंठों पे चिंगारी रखो
ज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो !
मोहब्बत के रंग मे डूबी शाम हो
एक नई शुरूआत का पैगाम हो
मिले तेरे होंठ मेरे होंठो से
जैसे मेरे होंठ तेरे और तेरे होंठ मेरे नाम हो ।
इश्क का कभी हमने इंकार नहीं किया
पर इस दिल को कभी इतना बेक़रार नहीं
किया बस आँखों में उनके सपने सजाये
रखे है मगर कभी हमने होंठों से इश्क का
इजहार नहीं किया !
बुझे लबों पे है बोसों की राख बिखरी हुई
मैं इस बहार में ये राख भी उड़ा दूँगा !
होंठो से तेरे होंठो को गीला कर दूँ
तेरे होठो को मै और भी रसीला कर दूँ
तु इस कदल प्यार करे की प्यार की
इन्तहा हो जाये तेरे होंठो को चूस कर
तुझे और भी जोशीला कर दूँ !
अजीब तरीका है उस पगले के जबाव
माँगने का होठों पर होंठ रख कर पुछता
है कुछ तो बोलो !
आज बरसात का मौसम सुहाना है
तेरे होठो का अपने होठो से मिलाना है ।
कभी दूर ना जाना तुम मै तुम्हे बहुत
मिस करूंगा अगर तुम दूर हुई तो
तेरी यादो को ही kiss करूंगा ।
जबसे तुम्हारे नाम की मिश्री होंठ लगाई है
मीठा सा गम् है और मीठी सी तनहाई है !
Lips Shayari for Girlfriend
काश मेरे होंठ तेरे होंठो को छू जाए
देखूं जहाँ बस तेरा ही चेहरा नजर आए
हो जाए हमारा रिश्ता कुछ ऐसा
होठो के साथ हमारे दिल भी जुड़ जाए ।
मोहब्बत करने वालों का यही हश्र होता है
दर्द-ए-दिल होता हैए दर्द-ए-जिगर होता है
बंद होंठ कुछ ना कुछ गुनगुनाते ही रहते हैं
खामोश निगाहों का भी गहरा असर होता है !

तुम एक खूबसूरत गुलाब जैसी हो
बहुत नाजुक एक सपने जैसी हो
होंठो से छूकर पी जाऊँ तुम्हे
सर से पाव तक एक शराब जैसी हो ।
मेरे होंठों पे अपनी प्यास रख दो और
फिर सोचो की इसके बाद भी दुनिया में
कुछ पाना ज़रूरी है !
हद से ज्यादा तेरे करीब आने को जी करता है
तेरे होंठो को होठो से छू जाने को जी करता है
तुम हो मेरे बेताब दिल की धड़कन
तुम्हे अपना बनाने को जी करता है ।
मैं इक फकीर के होंठों की मुस्कुराहट हूँ
किसी से भी मेरी कीमत अदा नहीं होती!
तेरे होठ गुलाबी और निगाहें शराबी
और कहती हो मेरे नियत में है खराबी।
मेरे प्यार का अफसाना भी है
इसमे प्यार का खजाना भी है
इसलिए चाहते है आपसे एक kiss मांगना
और आज kiss मांगने का बहाना भी है
तुम मुझे कभी दिल से कभी आँखों से
पुकारो ये होठों के तकल्लुफ तो ज़माने के लिए होते है..!
क्यूँ परखते हो सवालों से जवाबों को ‘अदीम’
होंठ अच्छे हों तो समझो कि सवाल अच्छा है!
उस के होंठों पे रख के होंठ अपने
बात ही हम तमाम कर रहे हैं !
तुझ सा कोई जहान में नाज़ुक-बदन कहाँ
ये पंखुड़ी से होंठ ये गुल सा बदन कहाँ!
इश्क तुझसे सनम जैसे मेरी बंदगी हो गई
चूमा जो तेरे माथे का गुलजार मेरी
जिन्दगी हो गई ।
अब बारिश में तुम्हारे संग नहाना है
सपना ये मेरा कितना सुहाना है
बारिश के कतरे जो तेरे होंठों पे गिरे उन
कतरों को अपने होंठों से उठाना है !
उसने होठों से छूकर दरिया का पानी
गुलाबी कर दिया हमारी तो बात और थी
उसने मछलियों को भी शराबी कर दिया।
Lips Shayari for Boyfriend
जब आती है याद तुम्हारी तो करके आँखे
बंद तुम्हे मिस कर लेता हूँ मुलाकात रोज
तो नही हो पाती इसलिए ख्यालो मे ही
तुम्हे kiss कर लेता हूँ ।
होंठ कह नहीं सकते अरमान दिल का
शायद नज़र से वो बात हो जाये
इस उम्मीद में हम करते है इंतजार रात का
की सपने में ही उनसे मुलाकात हो जाये !
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चलो संग मिलकर प्यार की गलियाँ घूम
लेते है प्यार का इजहार तो कर लिया
अब एक दूसरे को चूम लेते
अजीब तरीका है उस पगले के जवाब
माँगने का होठों पर होंठ रख कर
पुछता है कुछ तो बोलो।
मेरे होठो के करीब है होंठ तेरे
ऐसे में शराफत का सवाल कहां
करने दे जी भर के गुस्ताखियां
के अब इजाजत का सवाल कहां !
तेरी यादों में हम खुशी की तलाश करते हैं
अपने होंठों पर हँसी की तलाश करते हैं
तेरा खूबसूरत खयाल दिल में लिए
ऐ हमनशीं हम तेरी तलाश करते हैं।
जब मै रूठ जाऊं तो मुझे मना लेना
कुछ ना कहना बस होंठो को मिला लेना ।
Red Lips Shayari in Hindi
मैं तोहफ़ा चॉकलेट का देने गया था उसे
पर कम्बख्त उसके होठों की मिठास चुरा लाया
दूध के उफान कि तरह हैं मेरा गुस्सा
जनाब पर वो अपने होठों से फूक
मार सब शांत कर देती है !
आज चूमकर मेरे होंठो को वो एक अन्दर
से बोली सच बता दिल मे तेरे और
भी अरमान है की बस ।

सुना है तुम ले लेती हो हर बात का
बदला आजमाएंगे कभी तुम्हारे
होंठो को चूम कर ।
नाज़ुकी उस के लब की क्या कहिए
पंखुड़ी इक गुलाब की सी है
उस के होंटों पे रख के होंट अपने
बात ही हम तमाम कर रहे हैं
कितने शीरीं हैं तेरे लब कि रक़ीब
गालियाँ खा के बे-मज़ा न हुआ
शौक़ है इस दिल-ए-दरिंदा को
आप के होंट काट खाने का
सो देख कर तिरे रुख़्सार ओ लब यक़ीं आया
कि फूल खिलते हैं गुलज़ार के अलावा भी
क्यूँ परखते हो सवालों से जवाबों को ‘अदीम’
होंट अच्छे हों तो समझो कि सवाल अच्छा है
तुझ सा कोई जहान में नाज़ुक-बदन कहाँ
ये पंखुड़ी से होंट ये गुल सा बदन कहाँ
सिर्फ़ उस के होंट काग़ज़ पर बना देता हूँ मैं
ख़ुद बना लेती है होंटों पर हँसी अपनी जगह
एक दम उस के होंट चूम लिए
ये मुझे बैठे बैठे क्या सूझी
उन लबों ने न की मसीहाई
हम ने सौ सौ तरह से मर देखा
ख़ुदा को मान कि तुझ लब के चूमने के सिवा
कोई इलाज नहीं आज की उदासी का
मुस्कुराए बग़ैर भी वो होंट
नज़र आते हैं मुस्कुराए हुए
तिरे लबों को मिली है शगुफ़्तगी गुल की
हमारी आँख के हिस्से में झरने आए हैं
आता है जी में साक़ी-ए-मह-वश पे बार बार
लब चूम लूँ तिरा लब-ए-पैमाना छोड़ कर
बुझे लबों पे है बोसों की राख बिखरी हुई
मैं इस बहार में ये राख भी उड़ा दूँगा
लिप किश शायरी
कुछ तो मिल जाए लब-ए-शीरीं से
ज़हर खाने की इजाज़त ही सही
होंटों पर इक बार सजा कर अपने होंट
उस के बाद न बातें करना सो जाना

किसी को ख़्वाब में अक्सर पुकारते हैं हम
‘अता’ इसी लिए सोते में होंट हिलते हैं
काँपते होंट भीगती पलकें
बात अधूरी ही छोड़ देता हूँ
क्या करूँ ऐ तिश्नगी तेरा मुदावा बस वो लब
जिन लबों को छू के पानी आग बनता जाए है
अश्क आँखों से मिरी निकले मुसलसल लेकिन
उस ने इक हर्फ़-ए-तसल्ली न निकाला लब से
ग़ुरूर-ए-तिश्ना-दहानी तिरी बक़ा की क़सम
नदी हमारे लबों की तरफ़ उछलती रही
ये लब-ओ-रुख़्सार ये चेहरा तेरा पुर-नूर सा
तुझ को क्या देखा लगा जैसे कोई देखी ग़ज़ल
मिरे अशआ’र हैं वो आसमानी ख़्वाब जिन को
मिरी मिट्टी के होंठों पर उतारा जा रहा है
ज़ुल्म सह के भी मैं ने होंट सी लिए ‘ग़ाज़ी’
एक ज़र्फ़ उन का है एक ज़र्फ़ मेरा है
कोई मोजज़ाती सा एक दिल-रुबा लम्हा
उस के होंट खुल जाएँ मेरे लब पे ताला हो
होंटों पे तबस्सुम का लबादा तो नहीं था
ऐ दिल सम-ए-अंदोह ज़ियादा तो नहीं था

