120+ New Marne Wali Shayari in Hindi | मरने वाली शायरी 2025
जब दिल टूटता है, तो ज़िंदगी जीने की तमन्ना भी कहीं खो जाती है। कुछ दर्द ऐसे होते हैं जिन्हें सिर्फ शब्द ही बयां कर सकते हैं। Marne Wali Shayari In Hindi उन्हीं टूटे जज़्बातों, अधूरी मोहब्बत और गहरे दर्द को आवाज़ देती है। ये शायरियां उन लम्हों की कहानी कहती हैं जब इंसान खुद से भी हार जाता है। इस लेख में हम आपके लिए लाए हैं कुछ बेहद भावुक और दर्दभरी शायरियां जो आपके दिल को छू जाएंगी और शायद किसी को समझने का एक नया नज़रिया भी देंगी।
Marne Wali Shayari in Hindi
कुछ नहीं तो बस एक दिन ऐसा आये,
उसी के सामने मुझे सरे आम मौत आ जाये..!!
मुकद्दर में रात की नीद नही तो क्या हुआ,
जब मौत आयेगी तो जी भर के सो लूंगा..!!
वो भी कितनी हसीन शाम होगी,
जब मेरी जिंदगी मौत के नाम होगी..!!

सबने कहा इश्क़ दर्द है, हमने कहा ये दर्द कबुल है,
सबने कहा इस दर्द के साथ जी नहीं पाओगे,
हमने कहा इस दर्द के साथ मरना कबुल है..!!
करता हूं तुमसे मोहब्बत मरने पर इल्जाम होगा,
कफन उठा कर देखना होठो पर तेरा नाम होगा..!!
जिंदगी से दिल हार गया है,
अब तो सिर्फ मौत का सहारा है,
शायद उससे मिल के सुकून मिले..!!
सूरत उसकी खयालों से क्यो जाती नहीं,
नींद है आखों में मगर क्यों आती नहीं,
वो साथ थे तो मौत का खौफ था मुझे,
अब मैं तन्हा हु तो मौत क्यों आती नहीं..!!
ए जिंदगी किसी को इतना न सताया कर कि,
उसे मौत से मोहब्बत हो जाए..!!
हम उम्मीदों की दुनियां बसाते रहे,
वो भी पल पल हमें आजमाते रहे,
जब मोहब्बत में मरने का वक्त आया,
हम मर गए और वो मुस्कुराते रहे..!!
Marne Wali Shayari Girl
पता नही कौन सा जहर मिलाया था तुमने मोहब्बत मे,
ना जिंदगी अच्छी लगती है और ना ही मौत आती है..!!
अब तो बस मौत की ही प्राथना करते हैं हम,
इस बेरूखी जिंदगी में बस हर पल गम ही पाते है हम..!!
अब तो बस तेरी ही यादो के सहारे जी रहे है,
इस मौत जैसी जिंदगी में घुट-घुट कर मर रहे है..!!
मिटटी मेरी कब्र से उठा रहा है कोई,
मरने के बाद भी याद आ रहा है कोई,
ए खुदा कुछ पल की मोहलत और दे दे,
उदास मेरी कब्र से जा रहा है कोई..!!

तेरी महोब्बत की कमी मुझे हर पल महसूस होती है,
तेरे बिना जिंदगी मुझे मौत से भी बत्तर लगती है..!!
मौत मांगते है तो ज़िन्दगी खफा हो जाती है,
जहर लेते है तो वो भी दवा हो जाती है,
तु बता ऐ ज़िन्दगी तेरा क्या करू,
जिसको भी चाहा वो बेवफा हो जाती है..!!
मेरे मरने के बाद किसी को कोई ख़ास फ़र्क़ तो नहीं होगा,
बस एक तन्हाई रोयेगी की मेरा हमसफ़र चला गया..!!
मेरे मरने के बाद मेरी कहानी लिखना,
कैसे बर्बाद हुई मेरी जवानी लिखना,
और लिखना की मेरे होंठ खुशी को तरसे,
कैसे बरसा मेरी आँखूं से पानी लिखना..!!
किसी की यादों में तड़पने से बेहतर है मर जाना..!!
मरने को दिल करता है,
जब अपने ही हमसे दगा करने लगते है..!!
छोड़कर चला जाऊं अब तेरी यह दुनिया,
मेरे दाता मुझको इतनी सी इज़ाज़त दे दे,
मैंने पायी है नफरत सदा तेरी दी ज़िन्दगी से,
मौत तो अब लगा ले गले, इतनी मोहब्बत दे दे..!!
एहसान करो तो अपनी दुआओं में मेरी मौत मांगना,
अब जी भर गया है जिंदगी से..!!
हमे मोहब्बत उनसे इस कदर है,
वो ना मिले तो मर जाऊंगा..!!
मर जाने का ख्याल यू ही नही आता,
किसी की यादें जीना मुश्किल कर देती है..!!
तेरी बेरुखी सहने से बेहतर है,
मुझे मौत ही आ जाए..!!
है मौत का इंतजार पर उनपे भी ऐतबार है,
देखे पहले वो आता है या फिर मौत..!!
Marne Wali Shayari on Life
खबर मरने की जब आये तो यह न समझना हम दगाबाज़ थे,
किस्मत ने गम इतने दिए, बस ज़रा से परेशान थे..!!
अगर दुनिया में जीने की चाहत ना होती,
तो खुदा ने मोहब्बत बनाई ना होती,
लोग मरने की आरज़ू ना करते,
अगर मोहब्बत में बेवफाई ना होती..!!
यहाँ गरीब को मरने की इसलिए भी जल्दी है साहब,
कहीं जिन्दगी की कशमकश में कफ़न महँगा ना हो जाए..!!
मौत-ओ-हस्ती की कशमकश में कटी उम्र तमाम,
गम ने जीने न दिया शौक ने मरने न दिया..!!
उनके बिना हमारा एक पल भी जीना बहुत भारी है,
अगर वो अब हमारे पास नहीं आना चाहते तो इससे अच्छा हमें मौत आ जानी चाहिए..!!
जब इश्क़ में इंसान धोख़ा खा जाता है,
तब मौत आने जैसा मन अपने आप हो जाता है..!!
एक दिन हम भी कफ़न ओढ़ जायेंगे,
सब रिश्ते इस जमीन के तोड़ जायेंगे,
जितना जी चाहे सता लो मुझको,
एक दिन रोता हुआ सबको छोड़ जायेंगे..!!
जिन्हें हम अपना समझते थे
वही हमें पागल समझते थे..!!!
हे खुदा अब हमें अपने पास बुला ले
मरने की दवाई देकर चैन की नींद सुला दे
हम उनके प्यार में कुछ इस कदर मरने लगे है
जिंदगी के दर्द सहकर भी मुस्कुराने लगे है..!!!
खुशी आपके लिए गम हमारे लिए
जिंदगी आपके लिए मौत हमारे लिए !
मेरे मरने के बाद मेरी कहानी लिखना
कैसे बर्बाद हुई मेरी जवानी लिखना !
मिट्टी मेरी कब्र से उठा रहा है कोई
मरने के बाद भी याद आ रहा है कोई !
मेरा दिल निकाल लेना दफ़नाने से पहले
वो ना दब जाए जिसे दिल मे बसा रखा है !
जहर पीने से कहा मौत आती है मर्जी
खुदा की भी चाहिए मौत के लिए !
सबने कहा इस दर्द के साथ जी नही पाओगे
हमने कहा इस दर्द के साथ मरना कबुल है !
मै अब खाक हूं मुझ को जलाना छोड़ दे
कब्र पर मेरी तू उसके साथ आना छोड़ दे !
उम्र तमाम बहार की उम्मीद मे गुजर गयी
बहार आई है तो पैगाम मौत का लाई है !
कितना और दर्द देगा बस इतना बता दे
ऐसा कर ऐ खुदा मेरी हस्ती मिटा दे !
आशिक़ मरते नही सिर्फ दफनाए जाते है
कब्र खोद कर देखो इंतज़ार मे पाए जाते है
मौत ही इंसान की दुश्मन नही
जिंदगी भी जान लेकर जाएगी !
अंजाम ए वफ़ा यह है जिसने
भी मोहब्बत की मरने की
दुआ मांगी जीने की सजा पाए !
Dard Bhari Marne Wali Shayari
उसकी यादो ने मुझे पागल बना रखा है
कही मर ना जाऊ कफ़न सिला रखा है !
जरा चुपचाप तो बैठो कि
दम आराम से निकले
इधर हम हिचकी लेते है
उधर तुम रोने लगते हो !
अब मौत से कह दो कि नाराज़गी
खत्म कर ले वो बदल गया है
जिसके लिए हम ज़िदा थे !

ऐ मोहब्बत तिरे अंजाम पे रोना आया
जाने क्यूँ आज तिरे नाम पे रोना आया
इश्क़ से तबीअत ने ज़ीस्त का मज़ा पाया
दर्द की दवा पाई दर्द-ए-बे-दवा पाया
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ज़िंदगी क्या किसी मुफ़लिस की क़बा है जिस में
हर घड़ी दर्द के पैवंद लगे जाते हैं
कब ठहरेगा दर्द ऐ दिल कब रात बसर होगी
सुनते थे वो आएँगे सुनते थे सहर होगी
अब तो ख़ुशी का ग़म है न ग़म की ख़ुशी मुझे
बे-हिस बना चुकी है बहुत ज़िंदगी मुझे
मेरे हम-नफ़स मेरे हम-नवा मुझे दोस्त बन के दग़ा न दे
मैं हूँ दर्द-ए-इश्क़ से जाँ-ब-लब मुझे ज़िंदगी की दुआ न दे
मुझे छोड़ दे मेरे हाल पर तिरा क्या भरोसा है चारागर
ये तिरी नवाज़िश-ए-मुख़्तसर मेरा दर्द और बढ़ा न दे
जुदाइयों के ज़ख़्म दर्द-ए-ज़िंदगी ने भर दिए
तुझे भी नींद आ गई मुझे भी सब्र आ गया
इश्क़ की चोट का कुछ दिल पे असर हो तो सही
दर्द कम हो या ज़ियादा हो मगर हो तो सही
वही कारवाँ वही रास्ते वही ज़िंदगी वही मरहले
मगर अपने अपने मक़ाम पर कभी तुम नहीं कभी हम नहीं
दर्द ऐसा है कि जी चाहे है ज़िंदा रहिए
ज़िंदगी ऐसी कि मर जाने को जी चाहे है
Maut Marne Wali Shayari
क़ैद-ए-हयात ओ बंद-ए-ग़म अस्ल में दोनों एक हैं
मौत से पहले आदमी ग़म से नजात पाए क्यूँ
मौत का एक दिन मुअय्यन है
नींद क्यूँ रात भर नहीं आती
मौत का भी इलाज हो शायद
ज़िंदगी का कोई इलाज नहीं
ज़माना बड़े शौक़ से सुन रहा था
हमीं सो गए दास्ताँ कहते कहते

उस गली ने ये सुन के सब्र किया
जाने वाले यहाँ के थे ही नहीं
हुए नामवर बे-निशाँ कैसे कैसे
ज़मीं खा गई आसमाँ कैसे कैसे
रहने को सदा दहर में आता नहीं कोई
तुम जैसे गए ऐसे भी जाता नहीं कोई
कहानी ख़त्म हुई और ऐसी ख़त्म हुई
कि लोग रोने लगे तालियाँ बजाते हुए
आई होगी किसी को हिज्र में मौत
मुझ को तो नींद भी नहीं आती
मरते हैं आरज़ू में मरने की
मौत आती है पर नहीं आती
कौन कहता है कि मौत आई तो मर जाऊँगा
मैं तो दरिया हूँ समुंदर में उतर जाऊँगा
कम से कम मौत से ऐसी मुझे उम्मीद नहीं
ज़िंदगी तू ने तो धोके पे दिया है धोका
मौत से किस को रुस्तगारी है
आज वो कल हमारी बारी है
रोने वालों ने उठा रक्खा था घर सर पर मगर
उम्र भर का जागने वाला पड़ा सोता रहा
रोने वालों ने उठा रक्खा था घर सर पर मगर
उम्र भर का जागने वाला पड़ा सोता रहा

